वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर में सोने की कीमतें 6.3% गिर गईं। सोना अब भी जनवरी 2026 के अपने रिकॉर्ड हाई से लगभग 25% नीचे है। उस रिकॉर्ड स्तर पर सोना 5,405 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचा था।

संस्था का मानना है कि सोने की कीमतें एक अंतरिम तल (interim bottom) के करीब पहुंच रही हैं। WGC ने सोने में तेजी लौटने से जुड़ी तीन ऐतिहासिक शर्तें गिनाई हैं। इनमें से पहली दो शर्तें पूरी हो चुकी हैं, जबकि तीसरी शर्त अभी बाकी है।

तकनीकी तौर पर सोना कमजोर दिख रहा है, क्योंकि यह 200 दिन के औसत से नीचे कारोबार कर रहा है। इतिहास देखें तो 2005 से अब तक, जब दो शर्तें पूरी हुई थीं, सोने ने अगले 3 महीनों में औसतन 4.2% की बढ़त दी है।

WGC ने मौजूदा गिरावट की तुलना 2011 की गिरावट से करना गलत बताया है। संस्था के मुताबिक सोने के बुनियादी कारक 2011 की तुलना में मजबूत हैं। उसने 3,857 डॉलर प्रति औंस के फिबोनाची सपोर्ट स्तर का भी जिक्र किया है।

भारत में सोना लगभग 1.45 lakh प्रति 10 ग्राम पर है। देश में सोने का पिछला रिकॉर्ड हाई 1.80 lakh प्रति 10 ग्राम था। अजय केडिया का अनुमान है कि दिवाली तक भारत में सोना 1.95 से 2 lakh प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

सोने का दस साल का सालाना रिटर्न 12-13% बताया गया है। Tastylive के ग्लोबल मैक्रो हेड इल्या स्पिवाक ने कहा कि सोना ब्याज देने वाला एसेट नहीं है।

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ महंगाई की चिंताएं फिर से उभरी हैं।