भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने सोने के बदले दिए जाने वाले कृषि कर्ज़ों की सख्त जांच का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत बैंकों को यह साबित करना होगा कि कर्ज़ की रकम सचमुच खेती की जरूरतों में लगी है।

बैंकों के लिए नई शर्तें

बैंक किसान की असली खेती की जरूरत को जिले के लिए तय वित्त के पैमाने से मिलाकर देखेंगे। गिरवी रखा सोना या खुद को किसान घोषित करना अकेले काफी नहीं होगा, और ऐसा कर्ज़ प्राथमिकता क्षेत्र कृषि ऋण (Priority Sector Lending) की श्रेणी में तभी गिना जाएगा जब बाकी शर्तें भी पूरी हों।

बैंकों को खेती की गतिविधि की पुष्टि के लिए फील्ड इंस्पेक्शन के रिकॉर्ड रखने होंगे। फसल हाइपोथिकेशन से जुड़े दस्तावेज़ भी संभाल कर रखने होंगे।

जिन भूमिहीन किसानों के पास ज़मीन के मालिकाना हक के कागज़ नहीं हैं, उन्हें खेती का कोई दूसरा सत्यापन योग्य सबूत देना होगा।

जांच में फेल कर्ज़ों पर असर

जो कर्ज़ जांच में खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें प्राथमिकता क्षेत्र कृषि ऋण की श्रेणी में नहीं गिना जाएगा। ऐसे कर्ज़ों को सामान्य गोल्ड लोन माना जा सकता है।

सामान्य गोल्ड लोन महंगे होते हैं, इसलिए ऐसे कर्ज़ों पर ब्याज दर बढ़ सकती है। असल ब्याज दर बैंक की नीति, कर्ज़ की शर्तों और लेने वाले की पात्रता पर निर्भर करेगी।

ट्रेड बिल और PSL की जिम्मेदारी

RBI ने ANBC में LC से भुनाए गए ट्रेड बिलों को मिलने वाली छूट सीमित करने का प्रस्ताव भी रखा है। ऐसे बिलों को ANBC में शामिल करने से बैंकों की प्राथमिकता क्षेत्र उधारी की जिम्मेदारी बढ़ सकती है।

बताया गया है कि Rs 10,000 crore के हर भुनाए गए बिल पर PSL की जिम्मेदारी Rs 4,000 crore बनती है, जो 40% के हिसाब से है। जिन बैंकों पर यह बोझ ज्यादा होगा, वे PSLC सर्टिफिकेट खरीदकर अपना लक्ष्य पूरा कर सकते हैं।

इससे बैंकों का अनुपालन खर्च बढ़ सकता है। हो सकता है कि यह बढ़ा हुआ बोझ कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं पर डाला जाए।