केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने स्पष्ट किया है कि BSNL और MTNL की 2019 की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना के तहत दिए गए एक्स-ग्रेशिया भुगतान स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मुआवजे की श्रेणी में आते हैं। इन भुगतानों पर कर छूट की सीमा Rs 5 lakh रखी गई है।

CBDT के मुताबिक ऐसे भुगतान धारा 10(10C) के तहत आते हैं, न कि धारा 10(10B) के तहत। बोर्ड ने यह स्पष्टीकरण देने से पहले मामले की जांच दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) के साथ मिलकर की।

BSNL और MTNL की 2019 की ये योजनाएं स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजनाओं के रूप में बनाई गई थीं। योजना के तहत कर्मचारियों को तय अवधि के भीतर सेवानिवृत्ति का विकल्प चुनना होता था। मुआवजे की गणना पूरी की गई योग्य सेवा और सेवानिवृत्ति की आयु तक बची सेवा के आधार पर होती थी। कर्मचारी पेंशन और सेवानिवृत्ति के अन्य लाभ भी अपने पास रख सकते थे।

धारा 10(10C) के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति मुआवजे पर Rs 5 lakh तक की छूट मिलती है। यह छूट जीवन में केवल एक बार ली जा सकती है। Rs 5 lakh से ऊपर की रकम आम तौर पर वेतन आय के रूप में कर योग्य होती है। अगर यह छूट किसी पिछले आकलन वर्ष में ले ली गई है, तो उसे दोबारा नहीं लिया जा सकता।

यह स्पष्टीकरण उन कर्मचारियों पर लागू होता है जिन्होंने VRS मुआवजे के लिए धारा 10(10B) का दावा किया था। ऐसे लंबित कंडोनेशन आवेदनों पर CBDT की स्थिति के अनुसार विचार किया जाएगा।

स्पष्टीकरण से वास्तविक छंटनी (retrenchment) के मुआवजे पर मिलने वाली छूट वापस नहीं ली गई है। CBDT ने यह भी कहा कि इससे कोई नया कर नहीं लगाया गया है और मौजूदा छूट की सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है।