IRDAI बीमा कंपनियों के कमीशन और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च पर अंकुश लगाने के लिए नए नियम तैयार कर रहा है। Life Insurance Corporation of India (LIC) के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर R. Doraiswamy के अनुसार कंपनी प्रस्तावित सीमाओं में से अधिकतर के भीतर है।

उन्होंने कहा कि LIC डिस्ट्रीब्यूशन पर बहुत ज़्यादा खर्च नहीं करता रहा है, और कमीशन व दूसरे डिस्ट्रीब्यूशन खर्चों पर कंपनी की अपनी अंदरूनी सीमाएं रही हैं। उनके मुताबिक नियमों का LIC पर असर सबसे कम रहेगा, और रेगुलेटर की बताई कई सीमाओं के भीतर कंपनी आराम से है।

Doraiswamy के मुताबिक डिस्ट्रीब्यूशन पर ज़्यादा लागत रखने वाली बीमा कंपनियों पर ज़्यादा दबाव आएगा। रेगुलेटर का लक्ष्य डिस्ट्रीब्यूशन लागत घटाना बताया गया है। कमीशन की सीमा हटने के बाद डिस्ट्रीब्यूशन लागत तेज़ी से बढ़ी थी।

नियमों के तहत LIC को कुछ प्रोडक्ट्स में बदलाव करने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर बदले हुए नियमों की वजह से प्रोडक्ट्स वापस लेने, दोबारा फाइल करने या उनमें बदलाव करने पड़ें, तो इसका तुरंत असर हो सकता है।

LIC ने अपना फीडबैक रेगुलेटर को भेज दिया है। Doraiswamy की राय में इंडस्ट्री की प्रगति तभी होगी जब ग्राहक के हित में लाइफ इंश्योरेंस की अर्थव्यवस्था सुधारने वाला हर कदम उठाया जाए।

LIC का VNB मार्जिन 22.3% रहा। Q2 FY27 में standalone नेट प्रॉफिट 20.12% बढ़कर ₹12,076.02 करोड़ हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह ₹10,053.39 करोड़ था। कंपनी की नेट प्रीमियम आय 16.24% बढ़ी और यह ₹1,47,018.18 करोड़ तक पहुंची। सिंगल प्रीमियम आय ₹50,802.84 करोड़ से उछलकर ₹68,402.86 करोड़ पर पहुंच गई।

LIC ग्रामीण और छोटे शहरों पर ध्यान देगा, जो सबके लिए बीमा मिशन का हिस्सा है। FY2027 में LIC का फोकस इंडिविजुअल टर्म, सेविंग्स, एन्युइटी और ULIP की ग्रोथ पर रहेगा। LIC की Bima Sakhi योजना से अब करीब 66% पंचायतें कवर हो चुकी हैं। Doraiswamy के अनुसार भारत में बीमा की पहुंच विकसित देशों की तुलना में कम है।

उनके मुताबिक LIC शेयर बाज़ार में लॉन्ग टर्म निवेशक है, और वह ऐसे सेक्टर और कंपनियां देखती है जो लॉन्ग टर्म में वैल्यू बना सकें। जब बाज़ार ऊपर जाता है, तब कंपनी मुनाफे को बुक करके पॉलिसीधारकों के भुगतान समय पर सुनिश्चित करती है।