UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate) दिवाली के बाद फिर से लागू हो सकता है। National Payments Corporation of India (NPCI) ने संकेत दिए हैं कि नया ढांचा त्योहार के तुरंत बाद लागू होगा। हालांकि व्यापारियों को शुल्क कब से देना होगा, इसकी सटीक तारीख अभी तक नहीं बताई गई है।
MDR वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले चुकाता है। Unified Payments Interface (UPI) पर जनवरी 2020 से ज़्यादातर MDR शून्य रहा है। सरकार ने कहा है कि ग्राहकों के लिए सामान्य UPI भुगतान मुफ्त रहेंगे।
NPCI की स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को त्योहारी सीजन का हवाला देते हुए इसे लागू करने को टाल दिया था। इससे पहले इसकी मूल समय-सीमा 15 अक्टूबर 2026 तय थी। 15 सितंबर के ढांचे में संस्थाओं को 15 अक्टूबर से पहले अपग्रेड करने का समय दिया गया था।
प्रस्ताव के मुताबिक 0.4% MDR पात्र P2M UPI लेनदेन पर लगेगा, जो Rs 2,000 से ऊपर के हैं। Rs 75,000 और उससे ज़्यादा के लेनदेन पर MDR अधिकतम Rs 300 तक सीमित रहेगा। कुछ आवश्यक सेवाओं और पतले मार्जिन वाले क्षेत्रों पर Rs 5 का फ्लैट शुल्क प्रस्तावित है। पूंजी बाजार के लेनदेन के लिए अलग और कम दर रखी गई है।
उदाहरण के तौर पर, Rs 3,000 पाने वाले व्यापारी को Rs 12 MDR देना होगा। Rs 50,000 के लेनदेन पर Rs 200 का शुल्क लगेगा।
यह ढांचा निर्दिष्ट व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा, और यह वर्गीकरण व छूट के आधार पर तय होगा। यह हर उस व्यापारी पर लागू नहीं होगा जो UPI स्वीकार करता है। सबसे ज़्यादा असर Rs 2,000 से ऊपर भुगतान पाने वाले बड़े पात्र व्यापारियों पर पड़ने की उम्मीद है।
NPCI की ताज़ा घोषणा में जनवरी 2027 को नई समय-सीमा के रूप में नहीं बताया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लागू करने की तारीख 1 जनवरी 2027 तक टल सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
शुल्क कब से लागू होगा, इसकी जानकारी अलग से जारी की जाने वाली अधिसूचना में दी जाएगी। तब तक व्यापारियों और ग्राहकों के लिए अंतिम तारीख साफ नहीं है।