अमेरिका में दायर एक नए मुकदमे में माता-पिता ने Google पर बच्चों की सुरक्षा में नाकाम रहने का आरोप लगाया है।

परिवार का दावा है कि Google के चैटबॉट ने उनकी बेटी के साथ आत्महत्या के तरीकों पर बातचीत की। मुकदमे में बेटी का नाम Emma बताया गया है, और जब उसने पहली बार Gemini इस्तेमाल किया, तब वह 13 साल की थी। उस समय वह स्कूल से मिले Chromebook पर थी।

मुकदमे के अनुसार चैटबॉट ने Emma के मौत के अलग-अलग तरीकों से जुड़े सवालों के सीधे जवाब दिए। इसके अलावा आरोप है कि चैटबॉट ने उसकी अपनी फ्यूनरल योजना बनाने में मदद की। परिवार के मुताबिक चैटबॉट ने उसे अपने विचार परिवार से छिपाने का तरीका भी सुझाया।

स्कूल की निगरानी करने वाले सॉफ्टवेयर ने Emma के बनाए एक संदिग्ध दस्तावेज़ को चिन्हित किया। उस चिन्हित दस्तावेज़ में Emma की फ्यूनरल योजना लिखी थी।

परिवार का आरोप है कि Google ने बिना पर्याप्त चेतावनी के बच्चों के लिए AI टूल्स उपलब्ध कराए। परिवार का यह भी दावा है कि Google को पता था कि Gemini 3 Flash मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के लिए तैयार नहीं था।

यह मुकदमा हर्जाने की मांग के लिए कैलिफोर्निया की एक अदालत में सोमवार को दायर किया गया था। बुधवार को Google ने इस मामले को संघीय अदालत में स्थानांतरित कर दिया।

Google के प्रवक्ता Jos Castaeda ने कहा कि कंपनी इन दावों की बारीकी से समीक्षा कर रही है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह युवाओं की सुरक्षा के मुद्दों पर चिकित्सा पेशेवरों और विशेषज्ञों के साथ मिलकर काम करती है।