National Payments Corporation of India (NPCI) ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि Unified Payments Interface (UPI) पर शून्य मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अब टिकाऊ नहीं है। कंपनी के मुताबिक UPI इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए MDR शुल्क लगाया गया है।
NPCI के अनुसार UPI ने अगस्त 2026 में 24.51 billion लेनदेन प्रोसेस किए, जो उसका अब तक का सबसे ज़्यादा मासिक आंकड़ा है। उसी महीने UPI पर औसतन लगभग 791 million लेनदेन रोज़ हुए। वित्त वर्ष 2025-26 में UPI ने लगभग 241.62 billion लेनदेन प्रोसेस किए। NPCI ने कहा कि ये आंकड़े सिर्फ वृद्धि नहीं दिखाते, बल्कि ऐसी वृद्धि दिखाते हैं जिससे सिस्टम की सुरक्षा, मज़बूती और ढांचागत क्षमता पर कहीं ज़्यादा मांग पड़ती है।
सरकार ने व्यापारी भुगतान (P2M) पर 0.4% MDR का प्रस्ताव रखा है, जो ₹2,000 से ज़्यादा के लेनदेन पर लागू होगा। ₹2,000 तक के P2M भुगतान पर MDR पूरी तरह लागू नहीं होगा। व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) लेनदेन, जो कुल मूल्य का 70% है, किसी भी शुल्क से मुक्त है।
NPCI ने कहा कि यह सीमा आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों के कम मूल्य वाले भुगतानों को बचाने के लिए तय की गई है। कंपनी के अनुसार MDR लगभग 4% मर्चेंट लेनदेन पर लागू होगा। NPCI ने यह भी कहा कि लगभग 96% P2M लेनदेन इससे अप्रभावित रहेंगे।
NPCI का तर्क है कि MDR एक शुल्क है, कर या वैधानिक वसूली नहीं। कंपनी के मुताबिक MDR सिस्टम में हिस्सेदार लोग उसे चलाने की लागत वसूलने के लिए लेते हैं, और यह संसद, केंद्र सरकार या RBI के किसी विधायी या राजकोषीय अधिकार से लगाया गया कर नहीं है। NPCI ने उस दावे का भी विरोध किया है कि MDR लगाने के लिए नए कानून की ज़रूरत थी।
Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A ₹2000 से कम के UPI लेनदेन को शुल्क से छूट देती है। NPCI का हलफ़नामा 100 pages का है।
सरकारी प्रोत्साहन योजनाएं, जिनके तहत 2021-2022 से शून्य MDR की लागत सरकार उठा रही थी, सरकारी खजाने पर दबाव डाल रही थीं। स्थायी समिति के अनुसार 2026-27 के लिए ₹2,000 crore का आवंटन उद्योग की लागत के 11% को कवर करता था। समिति ने यह भी कहा कि यही आवंटन संभावित MDR वसूली के 14% को कवर करता था।
UPI स्टीयरिंग कमेटी ने प्रस्तावित MDR ढांचे का समर्थन किया है।
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