सोना और चांदी ETF ने लगातार दूसरे महीने नेगेटिव कैटेगरी औसत रिटर्न दर्ज किया है।

अक्टूबर में सोना ETF का औसत रिटर्न -5.22% रहा, जबकि चांदी ETF का -17.16%।

ये आंकड़े 2 नवंबर तक के हैं और Value Research से लिए गए हैं।

सितंबर में सोना ETF का औसत रिटर्न -4.58% था। अगस्त में तस्वीर अलग थी, जब सोना ETF ने 8.66% और चांदी ETF ने 8.18% का सकारात्मक रिटर्न दिया था। अक्टूबर में कोई भी सोना या चांदी ETF सकारात्मक रिटर्न नहीं दे सका।

सबसे कमजोर प्रदर्शन Zerodha Silver ETF का रहा, जो 17.52% गिरा। Zerodha Gold ETF में 5.28% की गिरावट आई। सोना और चांदी ETF अपने उच्चतम स्तर से लगभग 26% और 50% नीचे हैं।

एक साल के रिटर्न में सभी सोना और चांदी ETF सकारात्मक रहे हैं, और इनका औसत क्रमशः 15.79% और 25.04% है।

तीन साल के आंकड़ों में चांदी ETF की सूची में ABSL Silver ETF 34.69% के साथ सबसे आगे है। इसके बाद ICICI Prudential Silver ETF का तीन साल का रिटर्न 34.65% और Mirae Asset Silver ETF का 34.58% है। अभी किसी भी चांदी ETF का पांच साल का ट्रैक रिकॉर्ड पूरा नहीं हुआ है।

तीन और पांच साल की अवधि में UTI Gold ETF और LIC MF Gold ETF सबसे आगे रहे हैं। गोल्ड-सिल्वर रेशियो अभी 79 पर है।

Trackk के को-फाउंडर और CEO वेदांत गुप्ते ने कहा कि दो लगातार नेगेटिव महीने लंबी अवधि के मामले को नहीं तोड़ते, पर उम्मीदें ज़रूर बदल देते हैं। इस बार मुख्य कारण मांग नहीं, बल्कि ब्याज दरें हैं। उनके अनुसार बाज़ार सख्त US नीति की कीमत लगा रहे हैं, जिससे बिना ब्याज देने वाली धातुएं रखने की अवसर लागत बढ़ती है।

कोटक महिंद्रा AMC के फंड मैनेजर सतीश दोंदापति ने कहा कि हालिया गिरावट सोने के लंबे समय के निवेश मामले को नहीं बदलती, खासकर इसलिए कि ऊंची ब्याज दरें लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकतीं। उन्होंने चेताया कि सोना निकट अवधि में दबाव में रह सकता है और आगे और उतार-चढ़ाव संभव है। उनकी सलाह है कि मौजूदा स्तर पर पूरी रकम एक साथ न लगाई जाए, बल्कि गिरावट पर चरणों में खरीदारी की जाए।

गुप्ते ने कहा कि ज्यादातर निवेशकों के लिए सोना मुख्य कीमती धातु होनी चाहिए, और मौजूदा स्तर पहली छमाही से बेहतर प्रवेश बिंदु दिखाते हैं। चांदी ज्यादा गिरी है, पर वह औद्योगिक कमोडिटी की तरह ट्रेड करती है और लंबे समय तक अस्थिर रह सकती है। उनकी सलाह है कि चांदी को ज़्यादा से ज़्यादा एक छोटे सैटेलाइट हिस्से के रूप में रखा जाए। गुप्ते के मुताबिक इसे पांच साल से अधिक की अवधि के लिए रखें, या फिर बिल्कुल न रखें।

Wealth Cafe के फाउंडर हर्ष वर्धन दावर ने कहा कि जो लोग हर धनतेरस या दिवाली पर सोना खरीदते हैं या हर बार एक तय रकम लगाते हैं, वे उसी आदत को जारी रख सकते हैं। उनके अनुसार दोनों धातुओं के दाम गिरने से उसी रकम में ज़्यादा मात्रा मिलेगी, और यह एक तरह के सालाना SIP जैसा है जो जारी रहना चाहिए।

निवेशक अपने कुल पोर्टफोलियो का 10-15% तक सोना और चांदी में रख सकते हैं।

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