CBFC ने 26 October 2026 को नई एडवाइज़री जारी की है, जिसमें फिल्मकारों से कहा गया है कि वे रिलीज़ की योजना पहले से बनाएं और सर्टिफिकेशन को रिलीज़ से ठीक पहले जल्दबाज़ी में न करवाएं।
इस एडवाइज़री पर CBFC के सीईओ राजेंद्र सिंह के हस्ताक्षर हैं।
एडवाइज़री के मुताबिक़ फिल्मकारों को सर्टिफिकेशन के लिए अपना फाइनल वर्ज़न जमा करना होगा। फाइनल वर्ज़न में ग्राफिक्स, बैकग्राउंड म्यूज़िक, गाने और एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल होने चाहिए। अगर आवेदन अधूरा रहा तो फिल्म की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है और आवेदन ठुकराया भी जा सकता है। आवेदन तभी आधिकारिक माना जाएगा जब वह पूरी तरह से पूरा हो।
CBFC फिल्म के टाइटल की समीक्षा कर सकता है और प्रमोशनल टाइटल सहित बदलाव मांग सकता है। टाइटल की समीक्षा के नियम Cinematograph Act 1952 की धारा 5B(1) के तहत आते हैं।
रिलीज़ की तारीख तय होने से सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया तेज़ नहीं होती और उसका तरीका भी नहीं बदलता। रिलीज़ की योजना बनाते समय सर्टिफिकेशन के लिए पर्याप्त समय न होने से जो समस्याएं आती हैं, उनके लिए CBFC जिम्मेदार नहीं होगा।
यह एडवाइज़री उस समय आई है जब Jana Nayagan के सर्टिफिकेशन में देरी हुई और मामला अदालत तक पहुंचा, लेकिन उससे राहत नहीं मिली। इससे पहले Diljit Dosanjh की फिल्म Satluj को CBFC की मंज़ूरी नहीं मिली थी। Satluj ZEE5 पर रिलीज़ हुई और कुछ ही घंटों में उसे हटा दिया गया।
सितंबर में CBFC ने नई गाइडलाइन जारी की थीं। इसके साथ CBFC के बोर्ड में 18 नए सदस्यों की घोषणा हुई है। यह बदलाव 2017 के बाद पहली बार है जब CBFC का ढांचा नए सदस्यों के साथ पुनर्गठित हुआ है।
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