Baidu ने Apollo World नाम की एक AI प्रणाली लॉन्च की है, जो रोबोटैक्सी को प्रशिक्षित करने के लिए असली दुनिया जैसे ड्राइविंग माहौल की नकल करती है।

यह प्रणाली सिमुलेटेड रोबोटैक्सी माहौल के आगे बदलने के तरीके का अनुमान लगाने के लिए बनाई गई है। कंपनी के मुताबिक Apollo World रोज़ाना 100,000 km तक सिमुलेटेड ड्राइविंग तैयार कर सकता है। कंपनी का दावा है कि इसका रोज़ का आउटपुट असली दुनिया की टेस्टिंग के तीन साल के बराबर है। इससे असली समय में कैमरा और LiDAR डेटा की धाराएं भी तैयार होती हैं।

Apollo World का इस्तेमाल पहले से Apollo Go के रोबोटैक्सी बेड़े को प्रशिक्षित करने में हो रहा है। Apollo Go, Baidu के स्वामित्व में है और चीन का सबसे बड़ा रोबोटैक्सी ऑपरेटर है। इस क्षेत्र में उसका मुकाबला WeRide, Pony.ai और Momenta Global से है।

चीन की रोबोटैक्सी कंपनियों ने ज़्यादातर एसेट-लाइट विस्तार की रणनीति अपनाई है। Volkswagen की चीनी साझेदार XPeng 2027 में रोबोटैक्सी ऑपरेशन शुरू करने की योजना बना रही है। Morgan Stanley का अनुमान है कि 2035 तक चीन में 1 million रोबोटैक्सी वाहन होंगे।

Tesla अपने Cybercab रोबोटैक्सी बेड़े का विस्तार करना चाहती है। Tesla की सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक इंसानी ड्राइविंग के वीडियो पर प्रशिक्षित हुई है।

Management consulting firm Arthur D. Little में ऑटोनॉमस मोबिलिटी और शहरी परिवहन के विशेषज्ञ Frank McCleary ने कहा कि यह एक ऐसी चुनौती है जिसका सामना हर ऑटोनॉमस वाहन कंपनी को करना होगा। McCleary के मुताबिक किसी कंपनी की लॉन्च कितनी तेज़ी से हो पाती है, यह इस पर निर्भर करता है कि उसकी तकनीक माहौल के अनुरूप ढल सके, उसे समझ सके और उससे सीख सके।

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